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                                                      यह पुस्तक क्यों?


ज शायद ही कोई होगा, जिसे किसी प्रकार का कोई टेंशन न हो। किसी का गुस्सा बढ़ रहा है, तो कोई घर से भाग जाना चाहता है। कोई आत्महत्या करना चाहता है, तो कोई किसी की जान लेना चाहता है। किसी को तन्हा रहने का दुख है, तो किसी को किसी के साथ रहने का दुख है। सच तो यह है, यहां गंवाने वाला तो दुखी है ही, कमाने वाला भी संतुष्ट नजर नहीं आता। क्यों? क्योंकि सब में एक बात समान है और वह यह कि वह टेंशन का शिकार है। पर टेंशन क्या है, यह क्यों, किससे व किस बात की है, पता नहीं? बस इतना पता है कि टेंशन है। क्या टेंशन को जिम्मेदार ठहराने से समस्या हल हो जायेगी? शायद नहीं। इसके लिए हमें इसे समझना होगा कि यह क्या है? क्यों होता है तथा इसके लक्षण क्या हैं? और यह पुस्तक आपको यही समझाने का व उससे मुक्त होने का एक प्रयास है। क्योंकि थोड़ा बहुत टेंशन तो एक छोटे बच्चे से लेकर घर के बुजुर्ग को रहता ही है, पर जब यही टेंशन अगर धीरे-धीरे जमा होकर डिप्रेशन में बदल जाए, तो गंभीर समस्या रूप धारण कर सकता है, और डिप्रेशन का शिकार आदमी स्वयं के लिए तथा दूसरों के लिए भी परेशानी पैदा कर सकता है। यही कारण है कि आज गरीब व मजबूर ही नहीं समृद्ध व सेलिब्रिटी वर्ग के लोगों को भी किसी मनोविकार का शिकार होता हुआ व आत्महत्या करते हुए देखा जाता है। इतना ही नहीं घर-परिवार व समाज एवं विश्व आदि में बढ़ते उपद्रव, दंगे, दरार व हिंसा, इंसान की मानसिक स्थिति को दर्शाते हैं। ये सब गवाह हैं कि मनुष्य मानसिक रूप से अस्वस्थ है, जिसका प्रत्यक्ष व परोक्ष कारण है उसके जीवन में बढ़ता तनाव व अवसाद यानी टेंशन व डिप्रेशन। इससे पहले कि टेंशन डिप्रेशन का रूप धारण करे हमें उस टेंशन को ही मात देनी हI
    दरअसल तनाव के कदम इतने छोटे व सूक्ष्म हैं कि यह किस बहाने से जीवन में दाखिल होता जाता है और हमें पता ही नहीं चलता। न कोई आहट न कोई दस्तक, इस होशियारी से यह धीरे धीरे हमारे अंदर प्रवेश करता है व अपना साम्राज्य फैलाता है कि हमें कानों-कान खबर नहीं लगती। हमारी खुशियों को जैसे दीमक लगने लग जाती है। आज किसी को ऑफिस की टेंशन है, तो किसी को आपसी संबंधों की, किसी को जॉब की टेंशन है तो किसी को अकेलेपन की। छोटी-छोटी कहासुनी, अधूरे कार्य व असफलता आदि हमको टेंशन दे देती है। पर सोचने की बात तो यह है कि हम टेंशन लेते हैं या कोई हमें टेंशन देता है। आप अगर गहराई से सोचेंगे तो पायेंगे कि टेंशन कोई देता नहीं, हम लेते हैं। लोग व संसार तो हमें टेंशन हमेशा देंगे ही पर हमें इससे प्रभावित नहीं होना है, यह कैसे संभव है इसी बात को बखूबी समझाती है यह पुस्तक।

पुस्तक का मुख्य उद्देश्य आपको सरल, सुखद, शांत व आनन्दित जीवन देना है और यह तभी संभव है जब हमारा मन-मस्तिष्क स्वस्थ होगा, तनाव रहित होगा। जिस तरह टेंशन व डिप्रेशन होने के विभिन्न कारण हैं, उसी तरह इससे मुक्त होने के विभिन्न मार्ग व विधियां हैं। इसे दवा के साथ-साथ प्राकृतिक ढंग जैसे- योग, ध्यान, मुद्रा विज्ञान, आयुर्वेद, घरेलू नुस्खे, व्यायाम, रंग,संगीत, आत्मसम्मोहन, एक्यूप्रेशर एवं संगीत चिकित्सा आदि के माध्यम से भी ठीक किया जा सकता है। जो सब कुछ इस पुस्तक में उपलब्ध है। आशा है इस पुस्तक की मदद से आप अपने टेंशन का प्रबंधन कर पायेंगे, उसे डिप्रेशन नहीं बनने देंगे व उससे मुक्त हो पायेंगे।



                                ॥ विषय सूची ॥

1. क्या है तनाव और यह क्यों होता है ?

 2. तनाव एक कारण अनेक

3. क्या है तनाव के लक्षण 2

4. क्या आप मानसिक रूप से स्वस्थ है? 

5. क्या आप हमेशा दुखी और नाखुश रहते हैं ?

6. जरूरी है तनाव की पहचान

7. करें तनाव का विश्लेषण 

8. तनाव के कारण होने वाले रोग

9. ऐसे करें तनाव को कम

10. तनाव मुक्ति के उपाय 

11. आहार जो तनाव भगाएं

12. ऐसे रहें ऑफिस में तनाव फ्री

13. मानसिक रोग और महिलाएं

14. क्यों हो जाती हैं महिलाएं चिड़चिड़ी

15. पुरुष अपना दर्द क्यों छिपाते 

16. दांपत्य जीवन और तनाव

17. जाने, बच्चों के तनाव को 

18. डायरी लिखें तनाव से बचे

19. तनाव मुक्ति में सहायक ध्यान उपचार

20. तनाव मुक्ति में सहायक नींद

21. तनाव मुक्ति में सहायक चित्रकला

22. तनाव मुक्ति में सहायक स्नान 

23. तनाव मुक्ति में सहायक रेफलेक्सोलॉजी

24. श्वास में लिपा तनाव मुक्ति का मार्ग

25. तनाव का कारण तन का तनाव तो नहीं ?

26. तनाव मुक्ति में सहायक सुर-संगीत

27 तनाव कम करने में सहायक महाएं

28 तनाव मुक्ति में सहायक योग व मुद्राएं

29तनाव मुक्ति में सहायक रंग

30 में सहायक मुगध

31 में करे का प्रयोग 

32 से डिप्रेशन में उपयोगी भामन